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हम “पीएचसी” कहते हैं। एक छोटी सी इमारत, एक नर्स के लिए एक मेज़, दो तीन बिस्तर, और दीवार पर एक चार्ट जिस पर डॉक्टर का नाम लिखा है, “डॉ. अमुक, सप्ताह में सोमवार, बुधवार, और शुक्रवार।” आज मंगलवार है। एक महिला…","चौथा कारण, अनुबंध और प्रोत्साहन की कमज़ोरी।",{"slug":41,"title":42,"date":43,"modified":44,"excerpt":45,"punch":46,"category":11,"minutes":12,"series":13,"launch":13,"history":47},"police-act-1861-aur-azaadi-ke-baad-ka-ruka-sudhar","पुलिस अधिनियम 1861, और जिसे हम आज़ादी के बाद नहीं बदल पाए","2026-07-25T10:59:00","2026-06-24T23:12:01","एक थाने का दृश्य है। एक आम नागरिक एक छोटी सी शिकायत लेकर आया है। उसके पड़ोसी ने उसकी ज़मीन पर एक दीवार बढ़ा दी है, या किसी ने उसकी मोटरसाइकिल चुरा ली है, या कोई पुराना झगड़ा है जिसमें उसे डर है कि स्थिति बिगड़ सकती है। वह थाने के दरवाज़े पर पहुंचता है।…","तीसरी, राजनीतिक हस्तक्षेप के लिए दरवाज़ा खुला 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बिजली मरम्मत का काम सीख गया, कोई डिलीवरी का काम करने लगा। हर महीने थोड़ा थोड़ा पैसा गांव लौटता था। गांव के…","चौथा, छोटे शहरों की कमज़ोर अर्थव्यवस्था।",{"slug":62,"title":63,"date":64,"modified":65,"excerpt":66,"punch":67,"category":11,"minutes":12,"series":13,"launch":13,"history":14},"yuva-berozgari-aur-ladkiyon-ki-doohri-maar","युवा बेरोज़गारी का बढ़ता आंकड़ा, और लड़कियों की वह दोहरी मार","2026-07-22T13:51:00","2026-06-24T23:11:57","एक बेटी है, उम्र तेईस। तीन साल पहले उसने अपनी स्नातक की डिग्री पूरी की थी, अच्छे अंकों के साथ। पिछले तीन साल वह घर पर है। काम तलाश रही है, या यह कहना ज़्यादा ठीक है, काम का इंतज़ार कर रही है। घर वाले विरोध नहीं करते। वे कहते हैं, अगर अच्छा काम मिले,…","चौथी बात, “प्रशिक्षण” का धोखा।",{"slug":69,"title":70,"date":71,"modified":72,"excerpt":73,"punch":13,"category":11,"minutes":12,"series":13,"launch":13,"history":14},"nagrik-sanskar-ka-video-aur-vyavastha-ka-sach","नागरिक संस्कार का वीडियो, और टूटी हुई व्यवस्था का सच","2026-07-21T14:38:00","2026-06-24T23:11:56","एक सड़क है, किसी भी शहर की। दोपहर का समय है। एक आदमी सड़क के किनारे खड़ा है, और उसने अभी एक छोटा सा थूकने वाला काम किया है। उसके पीछे एक दूसरा आदमी खड़ा था, हाथ में मोबाइल। उस दूसरे आदमी ने पूरा दृश्य रिकॉर्ड कर लिया, और उसी रात अपने सोशल मीडिया पर…",{"slug":75,"title":76,"date":77,"modified":78,"excerpt":79,"punch":13,"category":11,"minutes":12,"series":13,"launch":13,"history":14},"paani-ka-doosra-desh-aur-tanki-ka-khaali-hona","पानी का दूसरा देश: जब टंकी ख़ाली होती है, सबकी एक साथ नहीं होती","2026-07-20T10:22:00","2026-06-24T23:11:55","सुबह के पांच बजे एक बस्ती में एक हैंडपंप के सामने पंक्ति लगी है। पहले नंबर पर एक महिला अपनी बाल्टी रखे खड़ी है। उसके पीछे दस और औरतें, बच्चे, और कुछ बुज़ुर्ग। हैंडपंप एक एक करके पानी देता है, और हर बाल्टी भरने में दस मिनट लगते हैं। दो घंटे की पंक्ति, चार 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बनाता","2026-07-18T14:06:00","2026-06-24T23:11:53","एक नौजवान है। उम्र चौबीस। पिछले महीने एक प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेज से डिग्री ली। पहली नौकरी मिल गई, एक बड़ी सेवा कंपनी में। अब वह एक बड़े शहर में रहता है, अच्छी सैलरी पाता है। उसका रोज़ का काम क्या है? वह एक ऐसे सॉफ़्टवेयर के कुछ हिस्सों पर लिखता है, जो एक विदेशी कंपनी…","पहली बात, अगर आप छात्र हैं या आपके परिवार में कोई छात्र है।",{"slug":95,"title":96,"date":97,"modified":98,"excerpt":99,"punch":13,"category":11,"minutes":12,"series":13,"launch":13,"history":14},"bijli-pahunch-gayi-andhera-kyon-hai","बिजली पहुंच गई, अंधेरा क्यों है: एक घोषणा और एक मीटर के बीच की दूरी","2026-07-17T12:48:00","2026-06-24T23:11:52","एक गांव है, देश के किसी कोने में। पांच साल पहले एक बड़ी ख़बर आई थी कि इस गांव में बिजली पहुंच गई। फीता काटा गया था, तस्वीरें छपी थीं, और राज्य के सरकारी काग़ज़ में यह गांव “विद्युतीकृत” की सूची में जोड़ा गया था। मतलब, अब इस गांव के सब घरों में बिजली 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टूटी…",{"slug":132,"title":133,"date":134,"modified":135,"excerpt":136,"punch":137,"category":11,"minutes":138,"series":13,"launch":13,"history":14},"do-bharat-jo-nikal-sakte-hain-aur-jo-nahin","दो भारत: एक जो निकल सकता है, और एक जो नहीं","2026-07-11T16:37:00","2026-06-24T23:11:46","एक ही शहर में, एक ही सुबह, दो बच्चे जागते हैं। पहले बच्चे के घर में आरओ का साफ़ पानी है। नाश्ते के बाद एक स्कूल वैन आती है, उसे लेकर एक निजी स्कूल जाती है। शाम को ट्यूशन है। बीमार पड़ा तो माता पिता के पास स्वास्थ्य बीमा है, फ़ोन पर एक डॉक्टर बुक…","चौथी, और सबसे ताक़तवर, बाहर निकलने का रास्ता।",10,{"slug":140,"title":141,"date":142,"modified":143,"excerpt":144,"punch":145,"category":11,"minutes":146,"series":13,"launch":13,"history":14},"sarvajanik-sthanon-ki-maut-aur-baithne-ki-jagah","बैठने को जगह नहीं है: एक शहर का चुपचाप ख़त्म होना","2026-07-10T15:14:00","2026-06-24T23:11:45","एक बूढ़ा आदमी है। शाम का वक़्त है। वह अपने मोहल्ले के उस पुराने पार्क में टहलने निकला है, जहां वह पिछले तीस साल से जाता आया है। कुछ क़दम चलने के बाद उसके घुटने थक जाते हैं। वह बैठने की जगह ढूंढता है। जिस बेंच पर वह बीस साल पहले बैठा करता था, वह…","तीसरी, और सबसे चुपचाप वाली, डिज़ाइन से बाहर कर देना।",11,{"slug":148,"title":149,"date":150,"modified":151,"excerpt":152,"punch":153,"category":11,"minutes":146,"series":13,"launch":13,"history":14},"teen-bhashayein-aur-bachche-ka-chura-hua-samay","तीन भाषाओं का बोझ: एक बच्चे का चुराया हुआ समय","2026-07-09T20:34:00","2026-06-24T23:11:44","एक बच्चा है। नौवीं कक्षा में पढ़ता है। उम्र चौदह साल। घर में जो भाषा बोली जाती है, वही उसकी मातृभाषा है। स्कूल में पढ़ाई अंग्रेज़ी या हिंदी में होती है। टीवी, यूट्यूब, और दोस्तों के बीच एक तीसरी सहज भाषा बन गई है। अब उसे कहा जा रहा है कि एक और भाषा अनिवार्य…","पहली भाषा , मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा। पूरी मज़बूती के साथ। यह बच्चे की सांस्कृतिक जड़ है। दूसरी 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ज़्यादातर लोगों को पता है। आपके सांसद का नाम क्या है। शायद पता है। आपके प्रधानमंत्री का नाम। पता है। अब ये सवाल पूछिए। आपके इलाक़े के तहसीलदार का नाम क्या है। आपके ब्लॉक के बीडीओ…","तहसील का कानूनगो , ज़िला कलेक्ट्रेट का बाबू",6,{"slug":180,"title":181,"date":182,"modified":175,"excerpt":183,"punch":13,"category":11,"minutes":184,"series":13,"launch":185,"history":47},"azaadi-ke-baad-hamne-jo-nahin-badla","आज़ादी के बाद हमने जो नहीं बदला, यह उसकी सूची है","2026-07-04T10:13:00","आज़ादी के दिन को 1947 से जब हमने नापना शुरू किया, तब से आज तक एक बात बार बार कही जाती है। हम औपनिवेशिक ग़ुलामी से मुक्त हुए। हम अपने मालिक ख़ुद बने। यह सच है, और यह बड़ी बात है। लेकिन एक और सच भी है, जो उतना नहीं बोला जाता। अंग्रेज़ चले गए।…",7,5,{"slug":187,"title":188,"date":189,"modified":190,"excerpt":191,"punch":13,"category":11,"minutes":192,"series":13,"launch":192,"history":14},"paanch-baatein-jo-vidhayak-kabhi-nahin-batayega","पांच चीज़ें जो आपका विधायक आपको कभी नहीं बताएगा","2026-07-03T09:01:00","2026-06-24T23:11:39","विधायक से जब भी मिलते हैं, बातचीत एक ही ढर्रे पर चलती है। उन्होंने क्या किया, क्या करने वाले हैं, कौन सी योजना ला रहे हैं, कौन सी सड़क बनवाई। यह सब अच्छी बात है। लेकिन कुछ बातें हैं जो आपके विधायक आपको खुद से कभी नहीं बताएंगे। ये बातें आपकी जानने की हैं, और…",4,{"slug":194,"title":195,"date":196,"modified":197,"excerpt":198,"punch":199,"category":11,"minutes":178,"series":13,"launch":200,"history":14},"whatsapp-paigam-sach-kyon-lagta-hai","WhatsApp पर आया हुआ हर पैगाम सच क्यों लगता है, और इसका इलाज क्या है","2026-07-02T18:27:00","2026-06-24T23:11:38","सुबह छह बजे। अंकल ने पारिवारिक ग्रुप में एक मैसेज भेजा है। शुरू में लिखा है “बहुत ज़रूरी जानकारी।” फिर एक चौंकाने वाली बात। नीचे लिखा है “इसे ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को भेजें।” आपने पढ़ा। एक पल को रुके। फिर सोचा, अंकल ने भेजा है, ग़लत तो नहीं भेजेंगे। बात भी सच लग रही…","जो हमारी राय से मेल खाए, वह जल्दी सच लगता 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बहुत आम था। “अच्छा, इनका बेटा क्या करता है आजकल।” यह सवाल किसी पर निजी हमला नहीं था। यह एक सामान्य सामाजिक जिज्ञासा थी। एक ईमानदार सवाल। क्योंकि अगर कोई व्यक्ति जनप्रतिनिधि…","यह स्वीकार कर लेना कि “सब एक जैसे हैं”",1,{"slug":217,"title":218,"date":219,"modified":220,"excerpt":221,"punch":222,"category":11,"minutes":146,"series":178,"launch":13,"history":47},"chhodo-bhi-wala-desh-aur-nyaya-ki-doori","“छोड़ो भी” वाला देश: न्याय जब इतना दूर हो जाए कि लोग मांगना बंद कर दें","2026-06-29T20:06:00","2026-06-24T23:11:36","हमारे देश में एक छोटा सा वाक्य बहुत बड़ी कहानी कहता है। “छोड़ो भी।” किसी ने आपका सामान चुराया, और आप थाने जाने की सोच रहे हैं। कोई कहता है, छोड़ो भी, थाने में बैठ कर पूरा दिन ख़राब हो जाएगा। किसी ने आपके साथ धोखाधड़ी की, और आप वकील के पास जाने की सोच…","न्याय व्यवस्था में सुधार को राजनीतिक मुद्दा बनाना",{"slug":224,"title":225,"date":226,"modified":227,"excerpt":228,"punch":13,"category":229,"minutes":138,"series":185,"launch":13,"history":47},"school-jo-sawal-poochna-bhula-deta-hai","स्कूल जो सवाल पूछना भुला देता है: हमारी पढ़ाई और हमारा लोकतंत्र","2026-06-28T12:08:00","2026-06-24T23:11:35","एक छोटा सा प्रयोग कीजिए। अपने आसपास के किसी भी स्कूल जाने वाले बच्चे से, चाहे वह कक्षा पांच में हो या कक्षा बारह में, यह पूछिए कि उसके स्कूल में पिछले हफ्ते किसी एक विषय पर खुली बहस हुई थी या नहीं। किसी ऐसे सवाल पर जिसका कोई एक सही जवाब न हो, बल्कि…","शिक्षा",{"slug":231,"title":232,"date":233,"modified":234,"excerpt":235,"punch":13,"category":11,"minutes":138,"series":192,"launch":13,"history":14},"aapke-paas-wali-sarkar-jise-aap-jante-nahin","आपके सबसे करीब वाली सरकार, जिसे आप जानते ही नहीं","2026-06-27T13:15:00","2026-06-24T23:11:34","हमारे देश में सरकार का नाम सुनते ही ज़्यादातर लोगों के दिमाग़ में दो चीज़ें आती हैं। दिल्ली में बैठी केंद्र सरकार, और राज्य की राजधानी में बैठी राज्य सरकार। टीवी पर बहस इन्हीं दोनों की होती है। व्हाट्सऐप पर गुस्सा इन्हीं दोनों पर निकाला जाता है। चुनाव की चर्चा इन्हीं दोनों के इर्द गिर्द…",{"slug":237,"title":238,"date":239,"modified":240,"excerpt":241,"punch":242,"category":11,"minutes":138,"series":200,"launch":13,"history":14},"chuppi-odha-hua-madhyavarg-ki-aadat","चुप्पी ओढ़ा हुआ मध्यवर्ग: सबसे ज़्यादा शिकायत, सबसे कम भागीदारी","2026-06-26T09:47:00","2026-06-24T23:11:32","अगर आप किसी भी शाम किसी भी मध्यमवर्गीय कॉलोनी के व्हाट्सऐप ग्रुप में झांकें, तो एक बात तय है। शिकायतें होंगी। सड़क की, ट्रैफिक की, बिजली की, टैक्स की, महंगाई की, भ्रष्टाचार की। आदमी दिन भर काम करता है, ईमानदारी से टैक्स भरता है, और बदले में जो चाहिए वह नहीं मिलता। बात सही भी…","यह विश्वास कि वोट देने से कुछ नहीं बदलता",{"slug":244,"title":245,"date":246,"modified":247,"excerpt":248,"punch":249,"category":11,"minutes":184,"series":208,"launch":13,"history":47},"kafila-ke-peechhe-daudti-bheed-aur-nagrik","नेताजी का काफिला और हमारी भीड़ वाली सोच: एक नागरिक के तौर पर खुद से पूछने लायक सवाल","2026-06-25T19:07:00","2026-06-24T23:11:31","हमारे देश में एक दृश्य बहुत आम हो चुका है। कोई जनप्रतिनिधि अपने इलाके में आता है। पचास, साठ, कभी कभी सौ गाड़ियों का काफिला। हूटर बजते हैं, धूल उड़ती है, सड़क के दोनों तरफ लोग खड़े हो जाते हैं। मोबाइल निकलते हैं, वीडियो बनते हैं, और अगले कुछ घंटों में वही वीडियो व्हाट्सऐप ग्रुप,…","ताकत के पास खड़े होने का अहसास खुद ताकत जैसा लगता है",{"slug":251,"title":252,"date":253,"modified":254,"excerpt":255,"punch":13,"category":11,"minutes":256,"series":215,"launch":13,"history":47},"british-shasan-ne-174-varshon-tak-bharat-ki-aawaz-kaise-dabai","बात पर पाबंदी, कलम पर कैंची, और सभा पर लाठी: 174 साल तक भारत की आवाज़ कैसे दबाई गई","2026-05-23T15:23:40","2026-05-23T15:23:41","रात के दो बजे का दृश्य कल्पना कीजिए, 1878 का एक छोटा सा कस्बा। एक छपाई की मशीन एक तंग गली में चल रही है। पीठ पर पसीना है, उंगलियों पर स्याही है, और एक छोटा सा अख़बार छप रहा है। दरवाज़े पर दस्तक होती है। तीन सिपाही अंदर आते हैं। मशीन सील कर दी…",12,1793627754311]