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स्कूल जो सवाल पूछना भुला देता है: हमारी पढ़ाई और हमारा लोकतंत्र
एक छोटा सा प्रयोग कीजिए। अपने आसपास के किसी भी स्कूल जाने वाले बच्चे से, चाहे वह कक्षा पांच में हो या कक्षा बारह में, यह पूछिए कि उसके स्कूल…
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आपके सबसे करीब वाली सरकार, जिसे आप जानते ही नहीं
हमारे देश में सरकार का नाम सुनते ही ज़्यादातर लोगों के दिमाग़ में दो चीज़ें आती हैं। दिल्ली में बैठी केंद्र सरकार, और राज्य की राजधानी में बैठी राज्य सरकार।…
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चुप्पी ओढ़ा हुआ मध्यवर्ग: सबसे ज़्यादा शिकायत, सबसे कम भागीदारी
अगर आप किसी भी शाम किसी भी मध्यमवर्गीय कॉलोनी के व्हाट्सऐप ग्रुप में झांकें, तो एक बात तय है। शिकायतें होंगी। सड़क की, ट्रैफिक की, बिजली की, टैक्स की, महंगाई…
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नेताजी का काफिला और हमारी भीड़ वाली सोच: एक नागरिक के तौर पर खुद से पूछने लायक सवाल
हमारे देश में एक दृश्य बहुत आम हो चुका है। कोई जनप्रतिनिधि अपने इलाके में आता है। पचास, साठ, कभी कभी सौ गाड़ियों का काफिला। हूटर बजते हैं, धूल उड़ती…
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बात पर पाबंदी, कलम पर कैंची, और सभा पर लाठी: 174 साल तक भारत की आवाज़ कैसे दबाई गई
रात के दो बजे का दृश्य कल्पना कीजिए, 1878 का एक छोटा सा कस्बा। एक छपाई की मशीन एक तंग गली में चल रही है। पीठ पर पसीना है, उंगलियों…