श्रेणी: बेबाक
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आपके मोहल्ले का सबसे ताक़तवर सरकारी अधिकारी कौन है, और आप उसका नाम तक नहीं जानते
एक छोटा सा प्रयोग कीजिए। अपने आप से ये सवाल पूछिए। आपके इलाक़े के विधायक का नाम क्या है। ज़्यादातर लोगों को पता है। आपके सांसद का नाम क्या है।…
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आज़ादी के बाद हमने जो नहीं बदला, यह उसकी सूची है
आज़ादी के दिन को 1947 से जब हमने नापना शुरू किया, तब से आज तक एक बात बार बार कही जाती है। हम औपनिवेशिक ग़ुलामी से मुक्त हुए। हम अपने…
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पांच चीज़ें जो आपका विधायक आपको कभी नहीं बताएगा
विधायक से जब भी मिलते हैं, बातचीत एक ही ढर्रे पर चलती है। उन्होंने क्या किया, क्या करने वाले हैं, कौन सी योजना ला रहे हैं, कौन सी सड़क बनवाई।…
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WhatsApp पर आया हुआ हर पैगाम सच क्यों लगता है, और इसका इलाज क्या है
सुबह छह बजे। अंकल ने पारिवारिक ग्रुप में एक मैसेज भेजा है। शुरू में लिखा है “बहुत ज़रूरी जानकारी।” फिर एक चौंकाने वाली बात। नीचे लिखा है “इसे ज़्यादा से…
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आपकी जेब से कितना पैसा कौन ले जा रहा है, और आप गिनते भी नहीं
एक बहुत सीधा सवाल। आप पिछले साल कितना टैक्स देते हैं, यह बता सकते हैं? ज़्यादातर लोग आय कर वाला आंकड़ा बता देंगे। दस हज़ार, बीस हज़ार, पचास हज़ार, जो…
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नेताजी का बेटा क्या करता है, यह सवाल अब चलन से बाहर क्यों हो गया
बीस साल पहले की बात है। मोहल्ले की चाय की दुकान पर बैठे लोग अगर किसी नेता का ज़िक्र करते, तो एक सवाल बहुत आम था। “अच्छा, इनका बेटा क्या…
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“छोड़ो भी” वाला देश: न्याय जब इतना दूर हो जाए कि लोग मांगना बंद कर दें
हमारे देश में एक छोटा सा वाक्य बहुत बड़ी कहानी कहता है। “छोड़ो भी।” किसी ने आपका सामान चुराया, और आप थाने जाने की सोच रहे हैं। कोई कहता है,…
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आपके सबसे करीब वाली सरकार, जिसे आप जानते ही नहीं
हमारे देश में सरकार का नाम सुनते ही ज़्यादातर लोगों के दिमाग़ में दो चीज़ें आती हैं। दिल्ली में बैठी केंद्र सरकार, और राज्य की राजधानी में बैठी राज्य सरकार।…
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चुप्पी ओढ़ा हुआ मध्यवर्ग: सबसे ज़्यादा शिकायत, सबसे कम भागीदारी
अगर आप किसी भी शाम किसी भी मध्यमवर्गीय कॉलोनी के व्हाट्सऐप ग्रुप में झांकें, तो एक बात तय है। शिकायतें होंगी। सड़क की, ट्रैफिक की, बिजली की, टैक्स की, महंगाई…
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नेताजी का काफिला और हमारी भीड़ वाली सोच: एक नागरिक के तौर पर खुद से पूछने लायक सवाल
हमारे देश में एक दृश्य बहुत आम हो चुका है। कोई जनप्रतिनिधि अपने इलाके में आता है। पचास, साठ, कभी कभी सौ गाड़ियों का काफिला। हूटर बजते हैं, धूल उड़ती…