श्रेणी: बेबाक
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जलाऊ लकड़ी का धुआं, और एक औरत की पूरी ज़िंदगी
सुबह के साढ़े पांच बजे का समय है। एक गांव की एक मिट्टी की रसोई। एक महिला घुटनों के बल बैठी है, एक चूल्हे के सामने। चूल्हे में लकड़ी है,…
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आंगनवाड़ी जो हर गांव में है, और जो ज़्यादातर में नाम भर है
एक गांव की एक संकरी गली के अंत में एक छोटी सी ईंट की संरचना है। सामने एक टूटा सा बोर्ड है जिस पर हरा रंग है, और लिखा है…
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आठ साल की उम्र में स्कूल छूटने वाले बच्चे, और 25 प्रतिशत का सच
खेत के एक कोने में एक छोटी सी आकृति है। आठ साल का बच्चा। हाथ में एक छोटी सी छड़ी है, और वह बकरियों को एक तरफ़ से दूसरी तरफ़…
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बारिश के तीन महीने: जिन गांवों में नक़्शा है, सड़क नहीं
जुलाई की एक रात है। एक गांव का मामला। एक आठ साल का बच्चा अचानक पेट पकड़कर रोने लगा। बुख़ार बढ़ रहा है, उसकी आंखों के नीचे काले धब्बे आ…
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शौचालय जो बन गया, और जो अब भी इस्तेमाल नहीं होता
सुबह के पांच बजे का दृश्य है, एक गांव का। एक आदमी अपने घर से निकलकर पीछे के खेत की तरफ़ चल रहा है। हाथ में एक छोटा लोटा है।…
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जब पीएचसी में डॉक्टर नहीं होता: गांव के अस्पताल की चुपचाप वाली कहानी
एक गांव से क़रीब बारह किलोमीटर दूर एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है, जिसे हम “पीएचसी” कहते हैं। एक छोटी सी इमारत, एक नर्स के लिए एक मेज़, दो तीन बिस्तर,…
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पुलिस अधिनियम 1861, और जिसे हम आज़ादी के बाद नहीं बदल पाए
एक थाने का दृश्य है। एक आम नागरिक एक छोटी सी शिकायत लेकर आया है। उसके पड़ोसी ने उसकी ज़मीन पर एक दीवार बढ़ा दी है, या किसी ने उसकी…
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धारा 144: एक उपनिवेशी हथियार जो आज भी काम कर रहा है
एक शहर है। शाम का समय है। कुछ नागरिक एक पार्क में जमा होने वाले थे, एक छोटी सी सभा के लिए। विषय क़ानूनी था, किसी राजनीतिक दल की रैली…
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गांव में कृषि की वापसी: जब विकास उल्टा चलता है
एक गांव है, देश के किसी एक हिस्से में। पंद्रह साल पहले इस गांव से जवान लड़के निकले थे। कोई शहर में फ़ैक्ट्री में लगा, कोई सिक्योरिटी गार्ड बना, कोई…
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युवा बेरोज़गारी का बढ़ता आंकड़ा, और लड़कियों की वह दोहरी मार
एक बेटी है, उम्र तेईस। तीन साल पहले उसने अपनी स्नातक की डिग्री पूरी की थी, अच्छे अंकों के साथ। पिछले तीन साल वह घर पर है। काम तलाश रही…