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ताली बजाना बंद करो, सोचना शुरू करो।

पांच चीज़ें जो आपका विधायक आपको कभी नहीं बताएगा

विधायक से जब भी मिलते हैं, बातचीत एक ही ढर्रे पर चलती है। उन्होंने क्या किया, क्या करने वाले हैं, कौन सी योजना ला रहे हैं, कौन सी सड़क बनवाई। यह सब अच्छी बात है। लेकिन कुछ बातें हैं जो आपके विधायक आपको खुद से कभी नहीं बताएंगे। ये बातें आपकी जानने की हैं, और ये पूरी तरह सार्वजनिक हैं।

यह पांच बातें हर मतदाता को मालूम होनी चाहिए।

1. उनकी संपत्ति पिछले चुनाव से अब तक कितनी बढ़ी

हर चुनाव लड़ने वाले को अपनी संपत्ति का पूरा ब्यौरा देना पड़ता है। यह चुनाव हलफ़नामे में होता है, और सार्वजनिक होता है। अगर आपका विधायक दो बार से चुनाव लड़ रहा है, तो उनके दो हलफ़नामे हैं। पहले वाले में जो संपत्ति लिखी थी, और अब वाले में जो लिखी है, उनकी तुलना कीजिए।

कुछ विधायकों की संपत्ति पांच साल में दो गुनी हो जाती है। कुछ की पांच गुनी। कुछ की दस गुनी। यह बढ़ोतरी की दर साधारण नौकरी या व्यवसाय से समझाई नहीं जा सकती। अगर एक विधायक की संपत्ति पांच साल में पांच गुनी हो जाती है, तो यह सवाल पूछने लायक है।

लेकिन वे ख़ुद यह नहीं बताएंगे।

2. सदन में उनकी हाज़िरी कितनी है

विधायक का बुनियादी काम क्या है। सदन में बैठना, बहस सुनना, बहस करना, कानून बनाने में भाग लेना, अपने इलाक़े के मुद्दे उठाना। यह सब विधानसभा में होता है।

हर विधानसभा अपने सदस्यों की हाज़िरी का रिकॉर्ड रखती है। यह आंकड़े सार्वजनिक हैं। कई विधायकों की हाज़िरी 30 प्रतिशत से भी कम है। यानी सदन के दस दिनों में से वे सात दिन नहीं आते। और फिर भी पूरा वेतन और भत्ता मिलता है।

जब हाज़िरी इतनी कम हो, तब इलाक़े का मुद्दा कौन उठाएगा। कानून बनाने में आवाज़ कौन रखेगा। यह बुनियादी सवाल है।

लेकिन वे ख़ुद यह नहीं बताएंगे।

3. सदन में उन्होंने पिछले पांच साल में कितने सवाल पूछे

विधायक की एक बड़ी शक्ति है, सरकार से सवाल पूछने का अधिकार। सदन में हर सत्र के दौरान विधायक सवाल लगा सकते हैं। हर सवाल का सरकार को जवाब देना पड़ता है। यह जवाब रिकॉर्ड पर आता है, और सरकार पर दबाव बनाता है।

कुछ सक्रिय विधायक एक कार्यकाल में सैकड़ों सवाल पूछते हैं। कुछ विधायक पांच साल में पच्चीस सवाल भी नहीं पूछते।

यह आंकड़ा भी सार्वजनिक है। विधानसभा की वेबसाइट पर है। कई स्वतंत्र संस्थाएं इसे आसान भाषा में पेश करती हैं।

जब विधायक सदन में सवाल नहीं पूछते, तब इलाक़े के मुद्दे कहां जाते हैं। यह सवाल हर मतदाता का है।

लेकिन वे ख़ुद यह नहीं बताएंगे।

4. उन पर कौन से आपराधिक मामले लंबित हैं

यह संवेदनशील है, लेकिन सच है। चुनाव हलफ़नामे में हर उम्मीदवार को बताना पड़ता है कि उन पर कौन से आपराधिक मामले लंबित हैं। यह सूची विस्तृत होती है, जिसमें मामले की धारा और संक्षिप्त विवरण होता है।

बहुत से जनप्रतिनिधियों पर मामले लंबित हैं। कुछ छोटे, कुछ बड़े। यह जानकारी निजी हमला नहीं है। यह क़ानूनी ब्यौरा है जो उन्होंने ख़ुद हलफ़नामे में लिखा है।

मतदाता को यह जानने का पूरा हक़ है। फिर वोट देने या न देने का फ़ैसला अपना है। लेकिन फ़ैसला बिना जानकारी के नहीं हो सकता।

लेकिन वे ख़ुद यह नहीं बताएंगे।

5. उनके इलाक़े के विकास कोष का कितना उपयोग हुआ

हर विधायक को अपने इलाक़े के विकास के लिए एक सालाना बजट मिलता है। यह बजट हर राज्य में अलग होता है, लेकिन कुछ करोड़ रुपये प्रति साल का होता है। यह सीधे विधायक की सिफ़ारिश पर ख़र्च हो सकता है, छोटे कामों के लिए जैसे सामुदायिक भवन, गलियां, हैंडपंप, पुस्तकालय।

इस कोष का उपयोग, कितना ख़र्च हुआ, किस काम पर हुआ, यह सब रिकॉर्ड में होता है। बहुत से विधायक इस कोष का बड़ा हिस्सा हर साल इस्तेमाल ही नहीं करते। वह पैसा वापस चला जाता है।

जब इलाक़े में गलियां टूटी हैं, हैंडपंप ख़राब है, पुस्तकालय बंद है, और विधायक के पास इन्हीं चीज़ों के लिए कोष है जो ख़र्च नहीं हुआ, तब सवाल पूछने का हक़ बनता है।

लेकिन वे ख़ुद यह नहीं बताएंगे।

जो आप कर सकते हैं

ये पांच बातें जानना बहुत मुश्किल नहीं है।

अपने विधायक का नाम लिखिए। चुनाव आयोग की वेबसाइट पर उनका हलफ़नामा खोजिए। उसमें संपत्ति और मामले मिल जाएंगे। विधानसभा की वेबसाइट पर हाज़िरी और सवाल मिल जाएंगे। विधायक निधि का उपयोग ज़िला कलेक्टर के दफ़्तर से या आरटीआई से मिल जाता है।

पच्चीस मिनट का काम है। एक बार कर लेंगे, तो अगले चुनाव में आपका वोट जानकारी पर आधारित होगा, सिर्फ़ छवि पर नहीं।

लोकतंत्र की पहली शर्त सूचित नागरिक है। नागरिक तब तक सूचित नहीं हो सकता, जब तक वह जानने की कोशिश न करे। और जानकारी आज की दुनिया में हर किसी से सिर्फ़ पच्चीस मिनट दूर है।

बस वे पच्चीस मिनट निकालने हैं।


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