श्रेणी: बेबाक
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बात पर पाबंदी, कलम पर कैंची, और सभा पर लाठी: 174 साल तक भारत की आवाज़ कैसे दबाई गई
रात के दो बजे का दृश्य कल्पना कीजिए, 1878 का एक छोटा सा कस्बा। एक छपाई की मशीन एक तंग गली में चल रही है। पीठ पर पसीना है, उंगलियों…
ताली बजाना बंद करो, सोचना शुरू करो।
रात के दो बजे का दृश्य कल्पना कीजिए, 1878 का एक छोटा सा कस्बा। एक छपाई की मशीन एक तंग गली में चल रही है। पीठ पर पसीना है, उंगलियों…